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श्रीगणेशाय नमः ॥ श्रीसीतारामचन्द्राभ्यां नमः
ॐ

सुंदरकांड पाठ हिंदी में

श्रीरामचरितमानस — सुन्दरकाण्ड
पंचम सोपान • पृष्ठ 1 • Sunderkand Path in Hindi
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श्लोक चौपाई दोहा हिंदी पाठ पृष्ठ 1 / 8

सुंदरकांड पाठ पढ़ने के लिए यह ShivMarg का पृष्ठ 1 है। यहाँ श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड का पाठ श्लोक, चौपाई और दोहा के क्रम में प्रस्तुत किया गया है। यदि आप Sundarkand Path in Hindi, सुंदरकांड की चौपाई, सुंदरकांड के दोहे या श्रीरामचरितमानस का सुन्दरकाण्ड पढ़ना चाहते हैं, तो इस पृष्ठ से पाठ शुरू करें और नीचे दिए पृष्ठ नेविगेशन से आगे बढ़ें।

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सुन्दरकाण्ड के बारे में

श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास से संबद्ध अवधी काव्य-परंपरा का प्रमुख रामभक्ति ग्रंथ है। सुन्दरकाण्ड इसका पंचम सोपान है और इसमें हनुमान जी की लंका-यात्रा, माता सीता की खोज, रामदूत के रूप में उनका संदेश और श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति से जुड़े प्रसंग आते हैं। यह पृष्ठ पाठ को पढ़ने के लिए क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।

श्लोक
१
शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघे निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्याशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् ।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरि वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम् ॥ १ ॥
२
नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा ।
निर्भरां मे मानसं च ॥ २ ॥
३
भक्ति प्रयच्छ रघुपुङ्गव कामादिदोषरहितं कुरु ।
अतुलितबलधार्म दनुजवनकृशानु सकलगुणनिधानं ।
रघुपतिप्रियभक्तं हेमशैलाभदेहं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
वानराणामधीशं वातजातं नमामि ॥ ३ ॥
चौपाई
१
जामवंत के बचन सुहाए।
सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई।
सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
जब लगि आवौं सीतहि देखी।
होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥
चौपाई
२
यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा।
चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा॥
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर।
कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥
बार बार रघुबीर सैभारी।
तरकेउ पवनतनय बल भारी॥
जेहि गिरि चरन देइ हनुमंता।
चलेउ सो गा पाताल तुरंता॥
जिमि अमोघ रघुपति कर बाना।
एही भाँति चलेउ हनुमाना॥
जलनिधि रघुपति दूत बिचारी।
तैं मैनाक होहि प्रनाम।
दोहा
१
हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह श्रमहारी॥
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥ १ ॥

सुंदरकांड पाठ हिंदी में — इस पृष्ठ पर क्या है?

यह पृष्ठ श्रीरामचरितमानस सुन्दरकाण्ड के क्रमिक ऑनलाइन पाठ का पहला भाग है। पाठक यहाँ श्लोक, चौपाई और दोहा को अलग-अलग खंडों में पढ़ सकते हैं। मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर आसान पठन के लिए पाठ को छोटे, स्पष्ट खंडों में रखा गया है।

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सुंदरकांड पढ़ते समय

धार्मिक पाठ को श्रद्धा और अपनी परंपरा के अनुसार पढ़ना व्यक्तिगत अभ्यास है। यदि आप संपूर्ण पाठ पढ़ रहे हैं, तो पृष्ठों को क्रम से खोलें ताकि पाठ का क्रम बना रहे। उच्चारण या पाठ-विधि के लिए अपनी पारिवारिक, क्षेत्रीय या गुरु-परंपरा का अनुसरण करें।

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