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श्रीगणेशाय नमः ॥ श्रीजानकीवल्लभो विजयते
ॐ
श्रीरामचरितमानस
पञ्चम सोपान
(सुन्दरकाण्ड) • पृष्ठ ८
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कवि परिचय
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस भक्ति, ज्ञान और मर्यादा का अद्भुत ग्रंथ है, जिसमें श्रीराम की कथा लोकभाषा में अत्यंत सुंदर रूप से प्रस्तुत की गई है।
चौपाई
५८
कनक थार भरि मनि गन नाना।
बिप्र रूप आयउ तजि माना॥
दोहा
५८
काटेहि पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहि पइ नव नीच॥ ५८ ॥
चौपाई
५८
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहि पइ नव सभय।
सिंधु गहि पद प्रभु केरे।
छमहु नाथ सब अवगुन मेरे॥
गगन समीर अनल जल धरनी।
इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी॥
तव प्रेरित मायाँ उपजाए।
सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए॥
प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई।
सो तेहि भाँति रहें सुख लहई॥
प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्ही।
मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्ही॥
ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी॥
प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई।
उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई॥
प्रभु अग्या अपेल श्रुति गाई।
करौं सो बेगि जो तुम्हहि सोहाई॥
दोहा
५९
सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ।
जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ॥ ५९ ॥
चौपाई
५९
नाथ नील नल कपि द्वौ भाई।
लरिकाई रिषि आसिष पाई॥
तिन्ह के परस किएँ गिरि भारे।
तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे॥
मैं पुनि उर धरि प्रभु प्रभुताई।
करिहउँ बल अनुमान सहाई॥
एहि बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ।
जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ॥
एहिं सर मम उत्तर तट बासी।
हतहु नाथ खल नर अघ रासी॥
सुनि कृपाल सागर मन पीरा।
तुरतहिं हरी राम रनधीरा॥
देखि राम बल पौरुष भारी।
हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी॥
सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा।
चरन बंदि पाथोधि सिधावा॥
छंद
समापन
निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ।
यह चरित कलि मलहर जथामति दास तुलसी गायऊ॥
सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना।
तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना॥
दोहा
६०
सकल मुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहि ते तरहि भव सिंधु बिना जलजान॥ ६० ॥
मासपारायण, चौबीसवाँ विश्राम
इति श्रीमद्रामचरितमानसे सकलकलिकलुषविध्वंसने पञ्चमः सोपानः समाप्तः।
(सुन्दरकाण्ड समाप्त)
श्रीराम स्तुति एवं मंगल मंत्र
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
॥ श्री रामचन्द्राय नमः ॥
॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥
॥ ॐ आञ्जनेयाय नमः ॥
॥ ॐ रामदूताय नमः ॥
॥ ॐ सीतारामाभ्यां नमः ॥
श्रीरामचन्द्र भगवान की जय।
पवनसुत हनुमान जी महाराज की जय।
जानकी माता की जय।
सुन्दरकाण्ड पाठ की जय।
🙏 श्री सीताराम चरणारविन्दार्पणमस्तु। 🙏