१
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भावार्थ: हम त्रिनेत्रधारी शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पका फल बेल से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही वे हमें भय और मृत्यु के बंधन से मुक्त कर अमरता की ओर ले जाएं।
लाभ: भय, अनिष्ट आशंका और रोग-भय से मुक्ति के लिए रात्रि में विशेष रूप से पढ़ा जाता है।
२
राम रक्षा स्तोत्र (आरंभिक श्लोक)
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥
भावार्थ: श्रीराम, रामभद्र, रामचन्द्र, सृष्टिकर्ता, रघुकुल के स्वामी और सीता जी के पति — इन सभी स्वरूपों को नमन।
लाभ: पूर्ण स्तोत्र सर्वांगीण रक्षा हेतु प्रसिद्ध है; समय की कमी होने पर केवल यह आरंभिक श्लोक भी श्रद्धा से पढ़ा जा सकता है।
३
हनुमान चालीसा – समापन दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
भावार्थ: हे पवनपुत्र, संकट हरने वाले, मंगलमूर्ति! राम, लक्ष्मण और सीता सहित आप मेरे हृदय में सदा निवास करें।
लाभ: पूरी हनुमान चालीसा या केवल यह दोहा — दोनों ही रात्रि में भय व बुरे स्वप्नों से रक्षा हेतु पढ़े जाते हैं।
४
विष्णु ध्यान श्लोक
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
भावार्थ: शेषनाग पर शांत भाव से शयन करने वाले, संसार के आधार, आकाश-सम विशाल, मेघ-वर्ण भगवान विष्णु को नमन — जो संसार के भय को हरने वाले हैं।
लाभ: शयन से पूर्व पढ़े जाने के लिए यह श्लोक विशेष रूप से उपयुक्त है, क्योंकि इसमें स्वयं विष्णु के शयन-भाव का वर्णन है।
५
देवी शरणागति श्लोक
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: हे सर्वमंगलों की मंगलस्वरूपा, कल्याणकारी, सब कार्यों को सिद्ध करने वाली, शरण देने योग्य त्रिनेत्रधारी गौरी — आपको नमन।
लाभ: मातृशक्ति की शरण में जाकर रात्रि में निर्भयता और मानसिक स्थिरता के लिए पढ़ा जाता है।
६
ॐ सांब सदाशिवाय नमः
ॐ सांब सदाशिवाय नमः
भावार्थ: "सांब" अर्थात अंबा (माता पार्वती) सहित — यह मंत्र शिव को उनकी अर्धांगिनी सहित, सदा-शिव (नित्य कल्याणकारी) स्वरूप में नमन करता है।
लाभ: शिव-शक्ति के संयुक्त स्वरूप का स्मरण कराने वाला यह मंत्र सोने से पहले 11 या 108 बार जपने पर मन को एकाग्र व शांत करता है।
७
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
भावार्थ: हम उस तेजस्वी, पापनाशक परमात्मा का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
लाभ: यद्यपि मुख्यतः प्रातःकालीन मंत्र माना जाता है, अनेक लोग इसे रात्रि में भी मन की शुद्धि हेतु पढ़ते हैं।
८
रात्रि सूक्त
परिचय: ऋग्वेद में रात्रि देवी को समर्पित एक सूक्त है, जिसमें रात्रि से सुरक्षा, शांति और भयमुक्त निद्रा की प्रार्थना की गई है। इसके श्लोक विशिष्ट वैदिक उच्चारण-शैली में हैं, अतः किसी शिक्षित पुरोहित या प्रामाणिक स्रोत से सीखकर ही पाठ करना उचित रहता है।
लाभ: परंपरा के अनुसार यह सूक्त रात्रि को देवीस्वरूप मानकर उससे संरक्षण की कामना करता है।