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✦ दुर्गा आरती — सम्पूर्ण पाठ ✦
॥ पद १ ॥
मुख्य पद — जय अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri | Tumko Nishidin Dhyavat, Hari Brahma Shivri
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
हे अम्बे गौरी, हे श्यामा गौरी — हे माँ, आपकी जय हो। भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव भी रात-दिन आपका ही ध्यान करते हैं।
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माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
Maang Sindoor Virajat, Teeko Mrigamad Ko | Ujjwal Se Dou Naina, Chandravadan Neeko
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
माँ की माँग में सिन्दूर सुशोभित है और मस्तक पर कस्तूरी (मृगमद) का तिलक है। आपके दोनों नेत्र उज्ज्वल हैं और मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर है।
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कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजे॥
Kanak Samaan Kalevar, Raktambar Raaje | Raktpushp Gal Maala, Kanthan Par Saaje
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
माँ का शरीर सोने के समान दीप्तिमान है और वे लाल वस्त्र धारण किए विराजमान हैं। गले में लाल पुष्पों की माला कण्ठ की शोभा बढ़ा रही है।
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केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
Kehari Vaahan Raajat, Khadg Khappar Dhaari | Sur-Nar Munijan Sevat, Tinke Dukhhaari
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
माँ सिंह पर विराजमान हैं और हाथों में खड्ग तथा खप्पर धारण किए हैं। देवता, मनुष्य और मुनिजन जो आपकी सेवा करते हैं, आप उनके दुःखों को हरने वाली हैं।
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कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योती॥
Kaanan Kundal Shobhit, Naasagre Moti | Kotik Chandra Divakar, Raajat Sam Jyoti
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
कानों में कुण्डल सुशोभित हैं और नासिका के अग्रभाग पर मोती चमक रहा है। आपकी ज्योति करोड़ों चन्द्रमा और सूर्य के समान प्रकाशमान है।
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॥ पद ६ ॥
शुम्भ निशुम्भ बिदारे
शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
Shumbh Nishumbh Bidaare, Mahishasur Ghaati | Dhumra Vilochan Naina, Nishidin Madmaati
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
माँ ने शुम्भ-निशुम्भ को विदीर्ण किया और महिषासुर का संहार किया। उनके नेत्र धूम्र-वर्ण (धुएँ जैसे श्यामल) हैं और वे सदा अपनी दिव्य मस्ती में मग्न रहती हैं।
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॥ पद ७ ॥
चण्ड-मुण्ड संहार
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
Chand-Mund Sanhaare, Shonit Beej Hare | Madhu-Kaitabh Dou Maare, Sur Bhayheen Kare
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
माँ ने चण्ड-मुण्ड का संहार किया और रक्तबीज का अन्त किया। मधु और कैटभ दोनों दैत्यों को मारकर आपने देवताओं को भयमुक्त कर दिया।
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॥ पद ८ ॥
ब्रह्माणी रुद्राणी
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
Brahmani, Rudrani, Tum Kamla Rani | Aagam-Nigam-Bakhani, Tum Shiv Patrani
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
आप ही ब्रह्माणी हैं, रुद्राणी हैं और कमला (लक्ष्मी) रानी हैं। आगम और निगम (शास्त्र) जिनकी महिमा का बखान करते हैं, वे शिव की पटरानी आप ही हैं।
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॥ पद ९ ॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
Chaunsath Yogini Mangal Gaavat, Nritya Karat Bhairu | Baajat Taal Mridanga, Aru Baajat Damru
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
चौंसठ योगिनियाँ मंगल गान करती हैं और भैरव नृत्य करते हैं। मृदंग पर ताल बज रही है और डमरू की ध्वनि गूँज रही है।
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॥ पद १० ॥
तुम ही जग की माता
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पत्ति कर्ता॥
Tum Hi Jag Ki Mata, Tum Hi Ho Bharta | Bhaktan Ki Dukh Harta, Sukh Sampatti Karta
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
आप ही जगत की माता हैं और आप ही सबका भरण-पोषण करने वाली हैं। आप भक्तों के दुःख हरने वाली तथा सुख-सम्पत्ति प्रदान करने वाली हैं।
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॥ पद ११ ॥
भुजा चार अति शोभित
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
Bhuja Chaar Ati Shobhit, Var Mudra Dhaari | Manvanchhit Phal Paavat, Sevat Nar Naari
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
आपकी चार भुजाएँ अत्यन्त शोभायमान हैं और आप वर-मुद्रा धारण किए हैं। जो भी नर-नारी आपकी सेवा करते हैं, वे मनचाहा फल पाते हैं।
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॥ पद १२ ॥
कंचन थाल विराजत
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
Kanchan Thaal Viraajat, Agar Kapoor Baati | Shrimalketu Mein Raajat, Koti Ratan Jyoti
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥
सोने के थाल में अगर और कपूर की बाती सुशोभित है। श्रीमालकेतु में करोड़ों रत्नों के समान ज्योति जगमगा रही है।
✦ फलश्रुति — Phalashruti ✦
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
Shri Ambe Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gaave | Kahat Shivanand Swami, Sukh Sampatti Paave
जो भी मनुष्य श्री अम्बे जी की यह आरती श्रद्धा से गाता है, उसे सुख और सम्पत्ति की प्राप्ति होती है — ऐसा स्वामी शिवानन्द जी कहते हैं।