पिया मोर बालक

Piya Mor Balak

🎼 विद्यापति (Vidyapati)
📜 14th Century Maithili
💚 Bhakti Geet

🌟 विद्यापति के बारे में

महाकवि विद्यापति (1352-1448) को मैथिल कवि कोकिल (मैथिली का कवि कोकिल) के नाम से जाना जाता है। वे मिथिला क्षेत्र (वर्तमान बिहार) के महान संस्कृत और मैथिली कवि थे।

इन्होंने राधा-कृष्ण की प्रेम कथाओं पर सुंदर भक्ति गीत लिखे जो आज भी लोगों के हृदय को छूते हैं। विद्यापति का प्रभाव केवल मैथिली साहित्य तक सीमित नहीं था, बल्कि बंगाल और पूरे पूर्वी भारत के साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा।

📝 गीत के बोल

पिया मोर बालक,
हम तरुणी गे।
✦
कौन पाप करलौं,
हे जननी गे!
पिया मोर बालक।
✦
सखी, पहिरलौं सुंदर चीर,
पिया के देखि जरै शरीर।
गोद में लऽ चलली बाजार,
लोक पूछै बारंबार —
“ई बच्चा के छथि?”
पिया मोर बालक।
✦
नहि मोरा देवर ई,
नहि छोट भाई।
भाग्य लिखल छल एहन,
हमर जीवन साथी।
हे बटोही, जँ भेटै नैहर,
माय-बाबू के कहियो सुनाय।
पिया मोर बालक।
✦
कहिहुन बाबा सँ किनु गाय,
दूध पियाकऽ बढ़त जमाय।
भनहि विद्यापति, सुनु नारी,
धैर्य धरु, भेटत मुरारी।
पिया मोर बालक।

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