परती गीत · शिव स्तुति

हे करुणा-निधि भोलानाथ

मूल रचना — ShivMarg

हे करुणा-निधि भोलानाथ, सुनु मोर पुकार,
भोर भेल अहाँ बिना, कोना करू पार।

तपसी रूप धारी अहाँ, बैसल कैलाश,
गंगा जट में सोहय, चंद्र शिर पास।
भक्तक हृदय मध्य बसथि, करैत उजियार, हे करुणा-निधि भोलानाथ, सुनु मोर पुकार।
नित्य प्रात उठि गाबय, नाम अहीं क'र,
मन क'र मलिनता हरू, दुख देहू दूर।
विष पीबि जग बचायल, अहीं दातार, हे करुणा-निधि भोलानाथ, सुनु मोर पुकार।
डमरू-नाद गुंजय जखन, कांपय संसार,
तांडव में समायल छै, सृष्टिक आधार।
भक्ति देहू, शक्ति देहू, हरू अंधकार, हे करुणा-निधि भोलानाथ, सुनु मोर पुकार।
॥ शुभम् ॥
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